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विशिष्टताएँ : संस्थान लगन और श्रम के साथ अनुशासन, समय की पाबंदी और नियमितता को भी सफलता के लिए आवश्यक […]

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संचालित पाठ्यक्रम UPSC Civil Services: आई.ए.एस. प्रारंभिक- सामान्य अध्ययन, इतिहास, लोक प्रशासन, समाज शास्त्र में नियमित कक्षाएं तथा भूगोल मार्गदर्शन. […]

टुटेजा ट्यूटोरियल्स: बढ़ते कदम

1989 में मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा में सर्वोच्च स्थान लेकर श्री अनिल टुटेजा डिप्टी कलेक्टर बने और अंचल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि थी. सफलता का उनका यह मार्ग कठिनाईयों से भरा हुआ था. इन कठिनाइयों का स्वरूप वैसा ही था जैसा कि आम तौर पर पिछड़े हुए क्षेत्र के सभी प्रतियोगियों के समक्ष होता है. जैसे- मार्गदर्शन का अभाव, अध्ययन सामग्री का अभाव, सफल लोगों से सम्पर्क का अभाव आदि. इन कठिनाईयों के कारण पिछड़े क्षेत्र के प्रतियोगी लक्ष्य प्राप्ति में सफल नहीं हो पाते. इस बात को ध्यान में रखते हुए श्री टुटेजा ने एक ऐसे संस्थान की परिकल्पना की जो नगर व अंचल के प्रतियोगियों को सफलता का सही मार्ग दिखा सके. उनकी यह कल्पना 1991 में टुटेजा ट्यूटोरियल्स के रूप में साकार हुई. टुटेजा ट्यूटोरियल्स द्वारा 1991 में म.प्र. लोक सेवा आयोग की राज्य सेवा परीक्षा हेतु नियमित मार्गदर्शन की शुरूआत की गई. पहले वर्ष में ही संस्थान ने सफलता को अपना अनुगामी बना लिया. साल दर साल ट्यूटोरियल्स की सफलता का आंकड़ा बढ़ता ही गया और आज तो टुटेजा ट्यूटोरियल्स सफलता का पर्याय ही बन गया है. यह सफलता एक निश्चित सोच का परिणाम है, संस्थान के संस्थापकों की आरंभ से ही यह स्पष्ट धारणा रही है कि-


‘सफलता का मार्ग सफल व्यक्ति ही दिखा सकता है’.
यह संस्थान का मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है क्योंकि सफल व्यक्ति को ही सफलता के मार्ग में आने वाली कठिनाईयों एवं उसके निवारण का अनुभव होता है, वह बेहतर जानता है कि पढ़ने की दिशा क्या होनी चाहिए? क्या पढ़ना चाहिए और क्या नहीं? और रणनीति में किस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए? संस्थान ने इसीलिए आरंभ से आज तक सफल व्यक्तियों को ही नए प्रतियोगियों के मार्गदर्शन का प्रभार सौंपा है और सदैव चयनित प्रतियोगियों को पदस्थापना से पूर्व अपने अनुभव बांटने के लिए आमंत्रित किया है. संस्थान के मार्गदर्शकों की सूची इसका प्रमाण है. यही कारण है कि संस्थान से सफल छात्रों की सूची हर वर्ष लम्बी होती जा रही है. जबकि अधिकांश प्रशिक्षण संस्थाओं में ऐसे प्रशिक्षक होते हैं जो कि स्वयं किसी प्रतियोगी परीक्षा में सफल नहीं हो पाते या अनेक वर्षों के प्रयासों में किसी निम्न पद पर चयनित हो पाते हैं. ऐसे संस्थान धनार्जन के लिए प्रायः सफलता के झूठे आंकड़ों से प्रतियोगियों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास करते हैं.
हमें गर्व है कि हमने अपने कार्य को एक मिशन के रुप में लिया है. संस्थान द्वारा व्यावसायिक दृष्टिकोण से परे रहकर ऐसे किसी भी प्रशिक्षार्थी को जो नियमित प्रशिक्षण प्राप्त करने में आर्थिक रूप से अक्षम हैं निःशुल्क मार्गदर्शन दिया जाता है.
आज लगातार बढ़ती प्रतिस्पद्र्धा के दौर में हमारा प्रयास है कि प्रतियोगी अपने को विकट परिस्थितियों के लिए तैयार रखे. हमें गर्व है कि शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा बिलासपुर नगर एवं छत्तीसगढ़ अंचल आज विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता के नये कीर्तिमान रच रहा है. यह तय हो गया है कि अंचल के प्रतियोगी प्रतिभा में किसी से कम नहीं हैं बस उन्हें सही दिशा की तलाश थी जो आज टुटेजा ट्यूटोरियल्स के रुप सहज उपलब्ध है. म.प्र. लोक सेवा आयोग के प्रतिवेदन (1991-95) में छत्तीसगढ़ के प्रतियोगियों के वर्चस्व को स्वीकारा गया है. हमारा विश्वास है कि छत्तीसगढ़ एवं म.प्र. लोक सेवा आयोग द्वारा अब कोई भी परिणाम घोषित किया जाएगा उसमें संस्थान के प्रतियोगियों का ही वर्चस्व रहेगा.
राज्य सिविल सेवा के अतिरिक्त संस्थान ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है. संस्थान के मार्गदर्शक श्री नवीन अरोरा का आई.पी.एस. एवं श्री नीरज दुबे का कस्टम्स में चयन इसका प्रमाण है.